Jaaton or Aryon ka udgam tatha Vaidik, Ramayan, Mahabharat or Bodhya kaalin stithi जाटों और आर्यों का उदगम तथा वैदिक, रामायण, महाभारत और बोध्यकालीन स्थिति
जाटों का उद्गम, आर्यों का इतिहास और वैदिक से बौद्ध काल तक की स्थिति भारत का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली रहा है। इस इतिहास में जाट समाज का उल्लेख कई कालखंडों में मिलता है। जाटों का उद्गम, आर्यों का इतिहास तथा वैदिक, रामायण, महाभारत और बौद्ध कालीन परिस्थितियों को समझना भारतीय संस्कृति और समाज के विकास को जानने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जाटों का उद्गम (Origin of Jats) जाटों के उद्गम को लेकर इतिहासकारों में अलग-अलग मत पाए जाते हैं। कुछ विद्वान मानते हैं कि जाटों का संबंध प्राचीन आर्य जाति से है, जबकि अन्य इन्हें मध्य एशिया से भारत आने वाले योद्धा समुदाय से जोड़ते हैं। इतिहास के अनुसार जाट मुख्यतः उत्तर भारत—हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान में बसे हुए हैं। जाटों को एक कृषक और योद्धा समाज के रूप में जाना जाता है। इनके अंदर स्वतंत्रता, साहस और संगठन की भावना प्रमुख रही है। कई इतिहासकार जाटों को प्राचीन "जट" या "जट्ट" शब्द से जोड़ते हैं, जिसका उल्लेख संस्कृत ग्रंथों और प्राचीन शिलालेखों में मिलता है। कुछ लोग जाटों का संबंध भगवान शिव की जटाओं से भी ...